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किसी से शिकायत नहीं मुझे, बस ख़ुद से न हो कोशिश रहती है !! inst- kalam.ki.takat

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Quote by kalam.ki.takat - हाथ की लकीर तो नहीं बदल सकता था
लेकिन क़िस्मत में क्या जानने का हक हैं

इस दुनिया को शायद समझ नहीं पाया
लेकिन ख़ुद को मुझे जानने का हक हैं

दो हाथ की रस्सी अब तक गले में होती
इस नज़र से दुनिया को देखने का हक हैं

बहती हवा की उस दिशा में तीर छोड़ना
पंछी का घायल होना शिकारी का हक हैं

सफ़र में राहगीरों को आराम नहीं मिला
ज़िंदगी से हार जाना मुसाफ़िर का हक हैं

जिस्म पर घाव गहरे और नये - पुराने थे
फूल से लगे घाव जानना कांटे का हक हैं

हार जीत के लड़ाई में जानना ज़रूरी था
दोनों में मुझ पर कितना किस-का हक हैं

गर आंखों से छलकता दर्द बेनकाब हो गया
मुझे इस आइना से सवाल करने का हक हैं

मेरा क़सूर तेरे इस गुनाह से बड़ा हो गया
तब मुझे भी यहां गुनाह करने का हक हैं

मुझे लड़ता देख किसी ने नहीं सोचा होगा
ज़िंदगी के सफ़र में मुझे जीतने का हक हैं

मैंने इस बार अपना पूरा मन बना लिया था
चाहे जीत या हार हो मुझे लड़ने का हक हैं

मुझे आख़िरी सांस पर लेजाकर छोड़ दिया
मुझ पर ज़िंदगी के इस ऐहसास का हक हैं - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - एक बार भी नहीं पूछा किस हाल में हो
कुर्बत मेरी पूछते तुम किस ख़्याल में हो

झूठी तारीफ़ कर मन को तसल्ली देते हो
मुस्कान होठों पे दिल में नफ़रत रखते हो

क्यों पास आने का तुम दिखावा करते हो
जब दूर से हमपर गहरा आघात करते हो

बाहर रौशनी दिखाने का स्वांग रचते हो
ख़ुद अंधेरे कमरे में रहना पसंद करते हो

हम बुरे थे क्यों ना अच्छे इंसान बनते हो
कर्जदार बनाके अच्छा मुनाफा कमाते हो

कुआं पर बैठकर पानी की बात करते हो
किसी प्यासे को लंबी उम्र की दुआ देते हो

राहगीर की कुशलता का बखान करते हो
खिलता फूल देख तोड़ने की बात करते हो

अपनी हंसी छुपाकर ग़मभरे बात करते हो
जब अपनी पर आए तो नंगा नाच करते हो - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - मेरी जरूरतें मेरा ख़्याल रखती थी
हद से ज़्यादा मुझसे प्यार करती थी

बेरहम ज़माना बड़ा ही सितमगर था
वो सीने में बैठकर छिपके वार करती थी

वह मेरा क़त्लेआम करती थी
इंसाफ़ की बात कर मुलज़िम मुकर्रर करती थी

अदालत मुझे सज़ा-ए-मौत देती
ज़िंदगी हर बार मुझे माफ़ करती थी

उसकी अदालत में माफ़ीनामा नहीं था
ज़िंदगी के नाम पर वह सौदा करती थी

जबकि वह जीने की ज़रिए बनकर
वो ख़ुद ही मौत की वज़ह बनती थी - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - मेरे बाद तुम मुझे याद करोगी
तब शायद हम बहुत दूर जा चुके होंगे

मेरे लौटने का तुम इंतज़ार मत करना
अब हम तुम्हारी पहुंच से बहुत दूर होंगे

जब भी याद सताएं आंखे बंद करना
हक़ीक़त में न सही ख़्वाब में मिलते रहेंगे

कभी माशूक बनकर इश्क़ की बातें करेंगे
कभी तुम्हारी बाहों में एक उमर बीता देंगे

तुम्हारे बग़ैर जी लगता नहीं अब मेरा
दिन की शुरवात हम हर शाम से करेंगे

हम तुम्हारा आज भी इंतज़ार कर रहे
यहां न सही पर हम वहां एक साथ रहेंगे

फूल जैसी खुशबू तुम्हारी जुल्फें से..
हम उससे लिपटकर ख़ूब रोया करेंगे

भीग गया बदन मेरा इन आसुंओ से
हम सूखे तालाब में भी सैलाब करेंगे

ग़र अब तुम मुझे ना मिली..
तो हम वहां भी दरख्वास्त करेंगे

तुम्हारे नाम की अर्ज़ी देकर
हम इंसाफ़ की बात करेंगे - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - फ़िक्र करने वाले अक्सर परवाह करना भूल गए - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - मुझे दिखावा नहीं करना आया
शायद इस लिए मैं बुरा था
कुछ बातें मुझसे कहीं नहीं गई
इसलिए सबसे ग़ैर गुजरा था

दर्द में आसू बहे तो रोक लिए
कांपते होंठ को थाम लिए
किससे दिल-ए-मुज़्तर कहता
महफ़िल में अपने भी मुंह मोड़ लिए

तुमने एक बार भी नहीं कोशिश की
हार के बाद जीत मुनासिब नहीं हुई
एक पहल और सही ज़िंदगी के लिए
ज़िंदगी की मुश्किलें आसान नहीं हुई

जीत की कोशिश में सब हार बैठा
हर किसी से नाता जोड़ बैठा
मैं अकेला था अकेला ही रह गया
शीशे का दिल पत्थर से टकरा बैठा

दिन में तपकर रात में रौशनी करता
दिन का उजाला रात को गमन करता
जल गई बाती तेल की कमी से
उस रौशनी में कोई फ़साद करता

सीने में ज़ख़्म दवा हर बार करता
ज़िंदा रहने की कोशिश बार-बार करता
पर ज़ख़्म इस बात पर गौर फरमाया
काश अब मैं इससे आज़ाद हो पाता

एक बार मौत दे सौ बार ज़िंदगी ना दे
इस बार गुज़ारिश मौत मुकर्रर कर दे
बा खुदा पिंजरे से तोता आज़ाद हुआ
अब लौटकर मनुष्यतन में जन्म ना दे - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - आज ख़ुद से कोई रूठ गया
जग से नाता टूट गया
ज़िंदगी जबसे रुख़सत हुई
वह ख़ुद से बहुत दूर गया

सबने अपना मुंह मोड़ लिया
बीच सफ़र में तन्हा छोड़ दिया
दो लम्हा सांसे थम गई
ज़िंदगी ने साथ छोड़ दिया

अंधेरी रात में भटकता दर बदर
हवा का रुख करता इधर उधर
मौत का फ़रमान जारी हुआ इधर
कि ज़िंदगी हो गई बे-ख़बर

वक्त दरमियान सब बदल गया
आज ख़ुद से कोई दूर गया
नम आंखों से सब निहार रहे
आज सबका साथ छूट गया

इस उम्मीद पर सब टीके रहे
आज सबका भरोसा टूट गया
जिसने भी साथ छोड़ा उसका
आज उन सबसे वह दूर गया

एक हादसे बीच मारा गया
सफ़र में हो चुकना चूर गया
आहिस्ता आहिस्ता नूर गया
वह ज़िंदगी से हो मजबूर गया

वह जीना.. तो भूल ही गया
जीने से जरूरी मरना हो गया
सब उसे छोड़ ही दिए थे
मौत इकलौता सहारा हो गया - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - दो हाथ की रस्सी गले में फिट बैठा
घर का लाडला फाँसी से झूल बैठा

उसकी चीखें चार दिवारी में कैद थी
वह ख़ुद को आज ख़ामोश कर बैठा

पंखे  से  लटक  रहा मय्यत उसकी
अपनी ख़ामोशी का सबब बन बैठा

कमरे की खिड़की उसके खुली थी
रौशनी के लिए वह रास्ता बन बैठा

कबसे अंधेरा से रिश्ता रहा उसका
आज ख़ुद को अंधेरा से जोड़ बैठा

आंख का वो तारा सितारा बन बैठा
सीने बिच घाव का इलाज़ कर बैठा

कमरे की आवाज़ हम-दर्द बन गई
ख़ुद से ख़ुद को मैंने जुदा कर बैठा

वह सभी मुश्किलें आसान कर बैठा
मुसाफ़िर ज़िंदगी का सौदा कर बैठा

दर्द में मुस्कुराता ग़म में ख़ामोश रहा
होठों पर मुस्कान लिए हल ढूंढ बैठा

कुल दीपक घर का चिराग़ बन बैठा
रौशनी के लिए दिया-बाती बन बैठा

दिल में छिपा दर्द का हाल कह बैठा
आज इन सबका मैं इलाज़ कर बैठा - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - तुम साथ दो हम सफ़र जारी रखेंगे
तुम कुछ कहो हम क़िताब लिखेंगे

कहीं पर धूप होगी कहीं छांव होगी
हम बिछड़े तो फ़िर कहानी में मिलेंगे

जहां तक चल सके तुम साथ देना
थक गए हम तुम्हें मज़ार में मिलेंगे

अपनी भी कोई एक कहानी होगी
ज़िंदगी रही तो बिछड़े प्यार मिलेंगे

कुछ तुम कहना कुछ हम भी कहेंगे
प्यार के अफसाने ज़िंदगी अधूरी लिखेंगे

मोहब्बत की बातें हमसे नहीं होती
हम तो हर बात सिर्फ़ तुम्हारी लिखेंगे

गुलाबी होठ समंदर सी गहरी आंखे
रेशमी जुल्फ़े ज़िंदगी तेरे नाम लिखेंगे

लिखेंगे मुलाक़ात सफ़र ख़ास लिखेंगे
साल गुजरे अंखियों की प्यास लिखेंगे - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - तुम मेरी दुनिया थी मैं चमकता माथे का सिंदूर था
तुमसे ही हर ख़ुशी मेरी तुमसे ही बसता संसार था

तुम धड़कन मेरी ये दिल धड़कता तुम्हारे नाम था
हाथ की चुड़ी मांग बिंदी से सुंदर लगता शृंगार था

तुम्हारे गले का हार इस बात का ज़िन्दा सबूत था
हाथ पे मेंहदी मेरे नामकी तुझे पसंद कोई और था

जिस आइने में देखा तुमको शायद कोई और था
क़िताब पे धूल जम गयी थी कहानी कुछ और था

कमरे से बाहर निकले तो रोशनी से मुखारविंद था
रास्ते पे खड़ा जैसे कि मौत को मेरा ही इंतज़ार था

एक मोड़ तक सफ़र मेरा उसे कुछ और मज़ूर था
इस छोर पर खड़ा मोहब्बत का करता इज़हार था

सात फेरे सात कसमें सात वादे एकतरफ़ा हो गए
मेरे मज़ार पर कहती रही वह मेरा पहला प्यार था

कुर्बानियां दी गई मोहब्बत में मैं बेनाम आशिक़ था
वे जीत गए इस-लिए रक़ीब का जिस्मानी प्यार था

कांटो की इस राह पर कोई फूल से खौफ़ज़दा था 
कोई छूने से डरता रहा कोई खुशबू का दीवाना था - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - तुम्हारी तस्वीर बार-बार देखता
नफ़रत की आग में जल रहा था
दिल में जो तड़प थी उसका क्या

तुमसे मिलने की रोज़ बहाने ढूंढता
बात करने की हर कोशिश करता
मेरी कोशिशें नाकाम रही उसका क्या

नम आंखों से तुम्हें निहारता
बंद कमरे में रोशनी करता
दिल के दरवाज़े बंद हुए उसका क्या

हर जगह से यादें मिटाता रहा
बंद कमरे में ख़ुद से बातें करता रहा
दिल में जो तस्वीर थी उसका क्या

तुमसे मिलकर जो ख़ुशी हुई थी
मानो संसार की खुशियां मिली थी
एक साथ सबकुछ बिखर गया उसका क्या

तुम्हें किसी और के साथ देखकर
मुझे सचमुच हैरानी नहीं हुई
तोहफ़े में फूल में ख़ंजर मिला उसका क्या - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - मर्द झुके नहीं थे उसे झुकाया गया था
कभी बेटा तो कभी बाप बनकर,
फ़र्ज़ की सूली पर चढ़ाया गया था

सबकी नज़र में कसूर भी मर्द होते
उन्हीं से हर रिश्ता निभाया गया था
हर जगह मर्द गुनहगार बताया गया था

नफ़रत की चिंगारी में वो जल रहा था
सुलगती आग में दफनाया गया था
मर्द को हर बार क़सूर ठहराया गया था

एक मर्द से ख़्वाब सजाया गया था
रोटी, कपड़ा और मकान के लिए..
मर्द से सपनो का महल बनाया गया था

पांव में बेड़ी थी उसे आज़ाद कहा था
आजादी के नाम पर मर्द ठगा गया था
इस जुल्मी दुनिया में मर्द सताया गया था

बदनामी की चादर ओढ़े घूमता मर्द था
जानवरों जैसी हरकत करता मर्द था
गली गली में घूमता फिरता रहता मर्द था

सबको गले लगाते सीने में घाव हो गया था
रुसवाई में ठेका से ताल्लुक़ हो गया था
फ़रेबी दुनिया में शराब से इश्क़ हो गया था - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - जयवंता का लाल वो धरती का वीर पुत्र था
कुंभलगढ़ की धरा पर लिया उसने जन्म था
चीते की चाल उसमें कहलाया भूमि पुत्र था
राजपूतों की शान वो मेवाड़ का राज पुत्र था

दुश्मन का काल वो सीने में उसके फ़र्ज़ था
दोस्तों का दोस्त वो दुश्मन के लिए मर्ज़ था
ठीक होता नहीं जिसे लगता एक घाव था
दहाड़ में जिसके ख़ौफ़ हो ऐसा वो गर्ज था

जिसके नाम में ख़ौफ हो ऐसा वो प्रताप था
सूरज बनके चमकता ऐसा उसमें प्रभाव था
रोशनी को रोकते बादल की क्या औक़ात था
शत्रु का काल वो दुखियों के लिए माँबाप था

9 माई सन 1540 को हुआ जिसका जन्म था
उसके नाम से ख़ौफ़ खाता अकबर अधम था
जिसे फ़कीर ने दिया एक ऐसा मूल मन्त्र था
अपने हाथ से ही अपना किया क्रिया कर्म था

भयभीत होकर आया नहीं युद्ध का मैदान था
कभी मान सिंह कभी भेजा बहलोल खान था
हल्दीघाटी ने सबको पहुंचा दिया श्मशान था
बहलोल खां की मौत से अकबर भी हैरान था - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - ये दर्द आख़िर कम क्यों नहीं होता
हर रोज़ नीलम होती आबरू मेरी
आख़िरकार कोई ख़रीददार नहीं होता

घाव पर घाव लगते समझ नहीं आता
किधर जाता रास्ता नज़र नहीं आता
हाथ से छूटी लगाम संभाला नहीं जाता

फूलों के बनावटी व्यौहार से रिश्ता रहा 
कोई कांटो से हरदम खौफ़जदा रहा
चूमता उसे बनावटी खुशबू में लिप्त रहा

कोई सुगंध हवा में खींचा चला जाता
उसके दरख़्वास्त पे अदालत नहीं होता 
ठग के ठगी का कोई भाव नहीं होता

सब्र के आसू घूट-घूट कर हम पीते रहे
झूठी तसल्ली सब इस मन को देते रहे
मरहम नहीं होता वह इलाज करते रहे

कोई भीतर से घुट - घुट कर जीता रहा
उसकी ख़ामोशी देखकर हैरान होते रहे
दरिद्र आंखों से उसकी ओर निहारते रहे

इस रोशनी से ज़रूर रहता वास्ता मेरा
लेकिन अंधेरा से वर्षों पुराना नाता मेरा
हर दिल से वाक़िफ मैं रहता फ़ासला मेरा - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - ये दुवाएं ये दवाएं धरी की धरी रह जाएगी एक दिन गिनती 100 पूरी हुई सांसे उल्टी चलेगी उस दिन किसी मर्ज़ की कोई दवा काम नहीं करेगी मौत का फ़रमान जारी हुआ जिस दिन - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - सच कह रहा हूं.. , मुझसे नहीं होता
आफ़त की आंधी में चला नहीं जाता

इस दूरी को नापते थक सा गया हूं
वक्त के दरमियान मैं थम सा गया हूं

लंबे सफ़र में कड़ी धूप का पहरा था
पांव नीचे छांव थी सरपे धूप गहरा था

पांव के छाले इस बात की गवाही देते
आपकी नज़ाकत हमें दर्द से रिहाई देते

दिल उस कमी को महसूस करता था
तुम्हारे बाहों में जीता यादों में मरता था

दिल-ए-मुज़्तर अपना ये फ़रमान दे-दे
शाम-ए-दवाई से अब हमें निजात दे-दे

आज बताता तुम्हें दिल-दिल नहीं रहा
सीने में ज़ख़्म दवा असरदार नहीं रहा

कोई अपना बनकर अपना नहीं रहा
इस जमाने में कोई तुम जैसा नहीं रहा

सितमगर ज़माना हम पर जुल्म करता
आपकी सर-ज़मीन पर वह हुक्म करता

जरा सी बात बरदाश्त नहीं पर करता था
वक्त की तेज़ रफ़्तार से मैं डरता था

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Quote by kalam.ki.takat - मेरी ख़ामोशी को मुझसे बेहतर समझा तुमने
मेरी तक़लीफ़ को मुझसे किया साझा तुमने

मेरे बुरे हालात हालाँकि क़रीब से देखा तुमने
मुझसे बेहतर शायद मेरे दर्द को समझा तुमने

चारों ओर से घिरा देखकर गौर किया तुमने
अकेले लड़ता देख मेरा ही शिकार किया तुमने

पीड़ा में मुझे देखकर तब मुस्कुरा दिया तुमने
ख़ामोश ए लबों से गहरा आघात किया तुमने

कुछ ना कहकर बहुत कुछ कह दिया तुमने
जज़्बात से खेलकर जज़्बाती बना दिया तुमने

मेरे हालात बुरे थे मुझे भला - बुरा कहा तुमने
वक्त के हाथ की लकीर को नकारा कहा तुमने

मुझ पर सवाल किया शराफ़त मुझमें नहीं था
गुनाहों के बस्ती का ख़ुद को शरीफ़ कहा तुमने

मेरी कहानी में अपना किरदार निभाया तुमने
मुझे बाहर करके ख़ुद को हीरो दिखाया तुमने

मेरे सूखे हुए ज़ख्मों पर मरहम लगाया तुमने
हकीम बनकर आज अपना धर्म निभाया तुमने - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - वह गुजरने की बात करता था
तूफ़ान लिए ठहरने की बात करता था

दिल में उसके उबार रहा
गले लगाकर सीने में घाव करता था

वह आंखों में संदर लिए
डूब मरने की बात करता था

ये मौसम बड़ा सितमगर रहा
धूप करके बेमौसम बरसात करता था

ठंड से होंठ मेरे कांप उठते
वह ठंड में हवाओं से बात करता था

इश्क़ का नशा इस कदर चढ़ा
वह मेरी आंखों से जाम चखता था

दिन की बाते रात को करता था
रात में वो काम की बातें करता था

कुछ इस क़दर हाल करके मेरा
वह दिन में चैन से आराम करता था - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - वीर जन्मे वह धरती राजस्थान की
बप्पा रावल राणा सांगा महाराणा प्रताप जी

महाराणा सांगा जैसे जन्में राजपुताना में
बाबर की सेना को धूल चटाया बयाना में

अपना ईमान नहीं खोया धर्म को बचाया
वचन की खातिर युद्ध को छावनी बनाया

80 घाव लगे तन पे व्यथा नहीं थी मन में
बाबर को धूल चटाना है ठान लिया मन में

जीत नहीं हाथ आई धोखा किया बाबर ने
गोला बारूद से परिणाम बदला क्षणभर में

बाबर की कायरता से यह सिद्ध हो गया
राजपूतों से युद्ध लड़ना हम पर भारी हो गया

मैं मरा नहीं होता तो बाबर जिंदा नहीं होता
खानवा के बाद लड़ने के काबिल नहीं होता

मेरे अपनो ने विश्वासघात किया नहीं होता
इतिहास के पन्नों में, मैं हारा हुआ नहीं होता

ऐसे - ऐसे वीर हुए हमारे राजपुताना में
जन्म हुआ उनका वो धरती राजस्थान में - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - तेरी आंखों से मैं ख़्वाब देखना चाहता था
एक तेरे साथ मैं दूर तक चलना चाहता था

सुकून से सफ़र कटता, तुममें संसार देखा था
मुहब्बत के शहर में इश्क़ का व्यापार देखा था

हुजूम की ये रुसवाई हमें आइना दिखाया था
शीशे का दिल मेरा इसे पत्थर से ठुकराया था

इस दिल पर सिर्फ़ तुम्हारा नाम लिखाया था
लेकिन तुमने हमें नफ़रत करना सिखाया था

जितनी मुहब्बत नफ़रत भी उतनी कर लेंगे
तेरी बेवफ़ाई में हम ख़ुद को बर्बाद कर लेंगे

तुम्हें पाकर लगा खुशी का ख़ज़ाना मिला था
इश्क़ के बाज़ार में नफ़रत का सिला मिला था

ख़ता इतनी थी इक बेवफ़ा से इश्क़ किया था
तुम्हारे दिये ज़ख़्म का मैं अमृतपान किया था

तुम्हारे हाथ का ज़हर मुस्कुराकर पी लिया था
इसे दवा समझके अपना इलाज़ कर लिया था

जिस कदर मुहब्बत किया हम तुम्हें भुला देंगे
तुम लौटकर भी आए अब तुम्हें क़ब्र में मि-लेंगे - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - मौत से पड़ा पाला मेरा उसे चाहिए साथ मेरा
गर्दिशो के मारे हुए किसने संभाला हाथ मेरा

होली की रंगों में रंग गया वह अंग - अंग मेरा
लेकिन बचा रह गया जो नहीं रंगा था ढंग मेरा

कोई आज भी बेसब्री से देख-रहा रास्ता मेरा
इंतज़ार की घड़ी बीत गई रहा नहीं वास्ता मेरा

साल का ये पर्व था ख़ुशी का रहा उत्सव मेरा
रात गुज़र भी जाती गर गुज़र जाता दिन मेरा

इस बार न सही अगली बार देखना प्यार मेरा
ज़िंदगी रही गर तब हर दिन होगा त्यौहार मेरा

इस जमाने की रुसवाई से हो गया निजात मेरा
नफ़रत की बाज़ार में मोहब्बत का जलूस मेरा

रग-रग से वाक़िफ़ मैं,हर दिल से रहा रिश्ता मेरा
टूटकर मोती बिखर गयी कमज़ोर रहा धागा मेरा

इश्क़ मोहब्बत प्यार वफ़ा सबने तोड़ा दिल मेरा
किससे रिश्ता जब दिल से नहीं रहा जुड़ाव मेरा

ज़िंदगी मौत के बीच बस इतना रहा फ़ासला मेरा
इक उम्र गुज़र गई किस ओर का पलरा भारी मेरा - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - जीना क्यों ज़रूरी था केवल मरने के लिए
सब कुछ पाना था सिर्फ़ छोड़ जाने के लिए

दर्द भरी कहानी हमसे बयां क्यों नहीं हुई
घोंसला बनकर तैयार हुआ मेहमान के लिए

तिनका-तिनका जोड़कर आशियाना बनाया
सपनो का महल बना मरघट में सोने के लिए

ता- उम्र भटकता रहा दो पल सुकून के लिए
रोशनी में भागते रहे अंधेरा से दोस्ती के लिए

कड़ी धूप में तप रहा ठहरा नहीं छांव के लिए
खुशियां क़ुरबान हो गईं इस ज़िंदगी के लिए

दर - दर की ठोकर खाता रहा जिस के लिए
बारी - बारी कंधा बदलते रहे श्मशान के लिए

ज़िंदगी तकल्लुफ़ हो गई इबादत के लिए
मन की मुराद अधूरी रह गई फ़रियाद के लिए

भीड़ में भी हम तन्हा रहे ज़िंदगी के लिए
सफ़र में कोई मिला नहीं हम सफ़र के लिए

ज़िंदा पर हकीम नहीं आया इलाज़ के लिए
मरने पर भीड़ इकठ्ठा हो गई दफनाने के लिए

कुछ बाते रह गई जिंदगी को सुनने के लिए
मोती टूटके बिखर गई एक माला बनाने के लिए - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - अब मैं एक लंबे समय के लिए यहां से जा रहा हूं अलविदा दोस्तों 12 दिसंबर को मेरी बुक पब्लिश हो रही है जिसका नाम "दो लफ़्ज़" है आसा है आपका प्यार जरूर मिलेगा यह बुक ऑनलाइन उपलब्ध होगी धन्यवाद ! 🙏🙏 - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - मेरी तक़लीफ़ तकल्लुफ़ हो गई जब नींद खुली हक़ीक़त बयां हो गई जुर्म लफ़्ज़ के रहें बरबाद जवानी हो गई सफ़र बीच अकेला खड़ा मैं, ज़िंदगानी मेरी अंधेरी रात की दीवानी हो गई - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - बहुत दिन हो गए आइना देखे हुए
मुझे याद नहीं रहा अब मैं कैसा दिखता हूं
जिसने जैसा कहां वैसा समझा है ख़ुद को
मन को तसल्ली देता परछाई में अच्छा दिखता हूं - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - कुछ रह गया कुछ साथ चला कुछ सफ़र में छूट गया एक दिन सब छूट जाता है कुछ साथ नहीं जाता फिर भी इंसान सब पाने की चाह में अपनो से दूर जाता है - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - ये हाथ हम पर बड़ा जुर्म करते हैं मेरे कोमल बदन पर लकीर खींचते हैं हाथों की झुर्रियां इस ठंड में अकड़ से जाते हैं रूखा मौसम हम पर सितम करते हैं इस कोमल बदन पर बड़ा जुर्म करते हैं - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - उन्हें एतबार करना नहीं आया शायद वक्त को मुनासिब नहीं लगा दिल की आवाज़ अनसुनी रह गयी नासूर पर मरहम काम नहीं आया - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - ज़िंदगी हमें बार-बार धोखा क्यों देती हैं जिससे सबसे ज्यादा उम्मीद होती हैं असल में हम उसी से दूर क्यों हो जाते हैं मुझे लगता है हमें संभले का एक मौका मिलता है मेरी ज़िंदगी का एक नया अध्याय शुरू होता है जिसके विलेन और हीरो दोनों का किरदार हमें करना पड़ता है हमारे सिर पर से अचानद बादल का छटना दर्शाता हैं हम कहीं आदि तो नहीं हो रहे हम किन परिस्थिति में हालात का सामना कैसे करते है जो हमें निपुण करता है जिसके लिए बादल का छटना जरूरी होता है - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - नमस्ते.... कैसे हो आप ?
उम्मीद करते हैं अच्छे होंगे काफ़ी लोगों के ज़हन में सवाल रहता है कि मैं कौन हूं क्या हूं मेरी लाइफ स्टाइल क्या है काफ़ी लोग मेरे बारे में ऐसा सोचते होंगे आपकी तरह मैं एक आम इंसान हूं मुझमें कुछ भी अलग नहीं है हां यदि कुछ हमें ख़ास बनाता है तो वह मेरी सोच है मेरे विचार है जो हमें आपसे अलग करता है, इतिहास में तमाम उदाहरण मिलते है इंसान को सफ़लता के लिए ता-उम्र हालातों से लड़ना पड़ता है जब सब दरवाजे बंद हो जाते है इंसान हार मानकर बैठ जाता है लेकिन उसके मन का दरवाजा तब भी खुला रहता है जिससे वह बाहर निकल कर नहीं देखता ऐसे में जब मन में कोई सवाल उठता है अब क्या कर सकते है? जहां मंज़िल के लिए जवानी से बूढ़ापे तक का सफ़र तय करना पड़े वहां पर ख़ुद को महज़ 4 से 5 साल का वक्त दिया है.!! - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - नमस्ते..... कैसे हो आप ?
उम्मीद करते हैं आप अच्छे होंगे बहुत दिन हो गया हमें एक दूसरे से मिले हुए एक दूसरे से बात किए एक दूसरे को देखे हुए समझ सकता हूं बहुत मन करता होगा मिलने का ढेर सारी बाते करने का मेरा भी मन करता है लेकिन मजबूर हूं हालात ने हमें दूर कर दिया एक अजनबी शहर में दर-दर भटकता हुआ मुसाफ़िर बना दिया कभी-कभी बहुत याद करता हूं मन करता है आपसे बाते करू फोन करू आपको देखने का बहुत मन करता है लेकिन रुक जाता हूं यह सोचकर बहुत तकलीफ़ होती है ख़ैर मेरी छोड़ो मैं जैसा भी हूं ठीक हूं अपना बताओं जानता हूं आप भी बहुत याद करते हैं आपको और तकलीफ़ देना नहीं चाहता इसलिए आपसे दूर हूं क्योंकि आपको रोता देखकर इन आंखो में आसू आ जाते है आप खुश रहे इसलिए बाते कम करता हूं लेकिन भरोसा रखिए जब वक्त और हम एक मोड़ पर होंगे तब हम ज़रूर मिलेंगे.!! - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - वैसे शादी की कोई उम्मीद नहीं गर हुई और माता रानी की इच्छा से लड़का हुआ बचपन में जब वह रोएगा तो उसे चुप रहने के लिए नहीं कहेंगे मैं चाहूंगा वह रोए क्योंकि वह आज रोएगा तभी कल खुश रहेगा कल उसे मेरी आदत न हो तकलीफ़ में उसे सहारे की ज़रूरत न पड़े मेरी अनुपस्थिति पर वह पीड़ा का सामना न करे इसलिए उसे आज रोना होगा ताकि वह कल किसी का मोहताज न रहे - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - बहुत दर्द था इस दिल में लेकिन किसी एक मरहम नहीं मिला बहुत कोशिशें की लेकिन किसी एक हल नहीं मिला घर से निकला मुसाफ़िर बनकर सफ़र के बीच रह गया मलाल इस बात का रहा एक-उम्र गुज़र गया फिर कोई घर नहीं मिला - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - बहुत दर्द था इस दिल में लेकिन किसी एक मरहम नहीं मिला बहुत कोशिशें की लेकिन किसी एक हल नहीं मिला घर से निकला मुसाफ़िर बनकर सफ़र के बीच रह गया मलाल इस बात का था ता-उम्र सफ़र में रहा लेकिन कोई हमसफ़र नहीं मिला - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - इतने भी बुरे नहीं हम जितना आप समझते थे माना कमियां थी लेकिन मजबूर थे गुनहगार होते ख़ता को माफ़ी का हक़दार समझते थे - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - मैंने कभी अपना दुःख नहीं लिखा क्योंकि जो दुःख था उसे नहीं लिखा - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - दिल में अरमान रहते तन्हा हो गया
तुम्हारे बिन यह संसार सुना हो गया

तुम्हारी यह कमी पूरी कैसे करता
उजड़ गयी दुनिया हरा भरा करता

तास के पत्तो की तरह बिखर गया
सब अपनी बारी का इंतज़ार करता

हर पल तुम्हारी यादें हमें सता रही
ख़्वाब बनकर हक़ीक़त बयां करता

तुम्हारे होने का ऐहसास कैसे करता
तुम्हारी कमी हर पल महसूस करता

तुम्हारे बिना संसार हमसे रूठ गया
आज हर कोई अपना हमसे दूर गया

आज मेरा खुदा भी हमसे रूठ गया
उसकी नाराज़गी हमें जुदा कर गया

तुम्हारे बग़ैर मैं जी-ते-जी मर गया
मेरी ज़िंदगी मौत की सज़ा बन गया - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - मैं रोता रहा वह रुलाती रही
प्यार के अफसाने कहानी सुनाती रही
इश्क़ में पागल निगाहे ख़्वाब दिखाती रही
तुमसे दूर जाने का गम याद आती रही

अपना हाल-ए-दिल का कहती रही
मुझपे इलज़ाम लगाकर ख़ता करती रही
लबों पर मुस्कान दिल में नफ़रत रखती थी
किसी की हक़दार मुझपे दावा करती रही

मुझे अपना बनाकर प्यार जताती रही
उसकी होकर मुझे अपना बताती रही
हर मुस्कान मुस्कुराहट नहीं होती
मेरे ज़ख़्मो पर वह मरहम लगाती रही

दिल में नफ़रत भरी दिखावा करती रही
चाहत उसके लिए फ़िक्र मेरी करती रही
फूल बनकर मुझसे रफ़ाक़त रखती रही
महक उसकी थी तारीफ़ मेरी करती रही

ख़त उसके लिए कसीदे मेरी पढ़ती रही
ख़्याल उसके थे ख़्वाब में मुझे देखती रही
धड़कन उसकी साँस मेरे नाम करती रही
वह उसकी होकर मुझसे प्यार करती रही - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - किताबों के बोझ तले दब गया
डिगरियों को निहारता सुबह-शाम रहता
न वह हमें सुकून देती न जीने की वज़ह
जिससे लगता मेरा कुछ होता काम रहता

लाइब्रेरियो में उलझी ज़िंदगी
क़िताब के बीच ख़ुद की तलाश में रहता
उलझता सुलझने की कोशिश में रहता
दूर भागता दफ़्तर तक के सफ़र में रहता

ज़िंदगी सुबह - शाम की रह गई
किससे मुलाकात किसी से भेट करता
फोन से हाय-बाय रिश्ता इनके बीच रहता
कौन समझता इसे, बेसहारा दिल रहता

कोई दुआ देता कोई मिन्नत करता रहा
खुदा गैर नहीं सबको अपना लगता रहा
कोई प्यार करता कोई फ़रियाद करता रहा
सबके लिए मैं कठपुतली का पुतला रहा

किससे अपना हाल-ए-दिल कहता
जब कोई अपनो के बीच गैर बनकर रहता
सबके लिए पराया कोई नहीं अपना रहता
कोई जानता मुझे मैं अजनबी बनकर रहता - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - क्यों वह दिन याद आते मुझे
कोई याद आता रहा
कभी ख़्वाब बनकर
कभी हक़ीक़त बनकर सताता रहा

भुलाया नहीं जाता वह शख़्स
उसे बहुत याद करता रहा
कोई बिछड़ कर मिल जाता
कोई ता-उम्र इंतज़ार करता रहा 

वह मुझे भूल गया
शायद उसे नहीं याद रहा
पर मैं उसे भूल जाता
वह हर रोज़ आता याद रहा

जिस मोड़ पर हम बिछड़े थे
जब उससे गुजरता याद करता
तुम्हें खोने का गम
उस लम्हें को महसूस करता

काश दो लम्हा ठहरा होता
शायद तुमसे दूर नहीं होता
उसे खोने का गम
उसकी कमी महसूस नहीं करता - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - मैंने ख़ुद को किसी के हाथों बिकने नहीं दिया
बाज़ारू ये आबरु नहीं लिलाम होने नहीं दिया
इल्ज़ाम बहुत थे हम पर कोई साबित करता
कोई पसंद आता किसी को बदनाम नहीं किया

ख्वाहिश दिल की थी अरमान बुझने नहीं दिया
उससे बात होती बात करना पसंद नहीं किया
दिल की बात को दिल तक पहुंचने नहीं दिया
हैरान था मुझे कोई जानने का मौका नहीं दिया

क्या मुझे जानते हो जानने का हक नहीं दिया
दिल के क़रीब होता पास कोई आने नहीं दिया
सबको यही लगता मैं भी सबकी तरह ही था
वक्त ने! किसी एक का अपना होने नहीं दिया

कोई मुझे जानता था इसका फ़िक्र नहीं किया
झूठी ख्वाहिश झूठा प्यार का दिखावा नहीं किया
दिल के पास रहते हो तो धड़कन जानते होंगे
किसी एक का रहा जिस्म का सौदा नहीं किया

हसरत ज़माने को पाने की पर चाहत नहीं किया
फ़िक्र उसकी करता जिसका ज़िक्र नहीं किया
मेरी ख़ामोशी आंखों से झलकती नज़र आयी
बहुत कुछ बयां करती कभी नुमाइश नहीं किया - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - अब वह बात नहीं रही जो पहले थी
याद नहीं हमारी आखिरी बात कब हुई पहले थी
ज़माने लग जाते हमें एक दूसरे से मिलते
लेकिन मिलने पर वह बात नहीं जो पहले थी

अल्फाज़ ख़ामोश रहे दिल की बात कहते
हम इंतज़ार करते रहे कब इज़हार करते
बात - बात में बस यूं ही शाम हो गई
वह जाने लगी हम आज भी इंतज़ार करते

उससे मिलना चाहते इत्तफ़ाक़ से बिछड़ गये
कसूर मेरा था जो हम उससे दूर गये
जाते - जाते लेकिन एक बात कहीं उसने
दूर हम थे आख़िर गर क्यों तुम हमसे दूर गये

नहीं मालूम बिछड़ने पर मिलते नहीं दुबारा
घाव इतना गहरा होता भरता नहीं दुबारा
कुछ ज़ख्म नासूर बन जाते कुछ सूख जाते
बहुत आये - गये उसके जैसा मिला नहीं दुबारा

उसकी याद में गुजरा लम्हा बेचैनी का सबब रहा
मैं ख़ुद को उसके गुनाह का मानता सबब रहा
कोई रात भर उसकी याद में रोता रहा
कोई उसके लौटने का आज इंतज़ार करता रहा - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - भूखा व्यक्ति नहीं देखता किसका जूठा है
प्यासा नहीं जानता यह पानी कैसा है
हवस में अंधा हो चुका मनुष्य नहीं पता
यह बेटी जैसी हैं कोई लगता बाप जैसा है

किस धर्म की बात करें कोई महफूज़ है
बाप बेटी का नहीं रहा दुनिया शर्मसार है
इंसान में इंसानियत नहीं बन गया हैवान है
लोग मानते इसे सब होता धर्म अनुसार है

मज़हब नहीं कहता हम तुम्हारे खिलाफ़ है
तुम साज़िश करो और हम तुम्हारे साथ है
ईश्वर ही सत्य है जो युगों से परिभाषित है
दिखावे के रिश्ते - नाते रहते हमारे साथ है

समाज के बनाए नियम किस पर लागू होते
कोई कहता साथ है कोई कहता पास होते
सैतान के भेष में ही पुरुष क्यों होते
गर वह इंसान होते तो फिर सैतान क्यूं होते

नारी का आदर करते मर्यादा पुरुषोत्तम है
विदुषी नारी नहीं श्रेष्ठ मानव धर्म सर्वोत्तम है
अज्ञानता की मूरत होते हम मूर्ख अज्ञानी है
नारी पर जुर्म करता मानव कैसे सर्वोत्तम है - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - आज का नर नारायण नहीं, नारी अपनी रखना लाज
किसके लिए लक्ष्मी बनी जो तुम पर चाहते करना राज

मानव में गुणवत्ता नहीं टहनी पर उसके पुष्प खिलता
कुपित है संसार इनसे नारियों को भोग वस्तु समझता

आज एक नारी औरत बनी अधेड़ उमड़ में यौवन हुई
त ब से रही उन पर दृष्टि हमारी, जबसे वह यौवन हुई

तुम  स्वयं  की  रखना  लाज श्री कृष्ण नहीं आने वाले
अब  इस  धरा  पर  स्वधर्म  के  पुष्प नहीं खिलने वाले

नारी  का करते सम्मान सब कहते हम तुम्हारे साथ है
हाथों  में  मोमबत्ती  लेकर  खड़े उसके शव के पास है

चीखती, चिल्लाती  रही  उसके देह को नोचते रहे सब
कान में परदा पड़ा था जो लेकर मोमबत्ती आ रहे अब

संस्कार मेरे भीतर थे उससे पोषित था पर क्या करता
पुष्प की सुगंध से उस ओर आकर्षित हुआ क्या करता

मानते सब थे वस्त्र हरण को पर इसे कोई नहीं जानता
जिस कारण महाभारत हुआ दुर्योधन को नहीं जानता

टुकड़ों - टुकड़ों में बट गया था भाई के हाथों मारा गया
अंत इतना भयावह था सदियों तक उसे याद रखा गया

जब  सोच  तुम्हारी  पंगु  है  क्या  हश्र  तुम्हारा तब होगा
सौ  अपराध  ही छमा थे कोई शिशुपाल नहीं अब होगा - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - मैं  कैसे  भुला  दू  उसे  भुलाया  जाता  नहीं
उससे ही मुस्कान मेरी मुस्कुराया जाता नहीं

उसे ढूंढती ये पागल निगाहे वह मिलता नहीं
विरह कीअग्नि में तप रहा कहीं दिखता नहीं

साल हो गया उससे मिले क्या रहा याद नहीं
जबसे हम जुदा हुए उससे मेरी हुई बात नहीं

ज़माने में ढूंढते दर्द के सिवा कुछ मिला नहीं
दिल इबादत क र रहा मैं इतना भी बुरा नहीं

उसके साथ गुजारे पल  भुलाया  जाता  नहीं
उसकी कमी को पूरा करता कोई मिला नहीं

उसकी यादें सुबह शाम आती तो जाती नहीं
उसे भू ल ना अब मेरे लिए रहा आसान नहीं

कैसे भूल जाता  उसे  मुझसे  हो  पाता  नहीं
बीते लम्हें याद आते किसी से कह पाता नहीं

उसकी बाहों से लिपट कर बताना चाहता हूं
उसके बाद अब रहा कोई मेरा ह म द र्द नहीं

किसी के सीने लगना ख़्याल मुझे आया नहीं
उसके बाद किसी को मेरा ख़्याल आया नहीं

बहुत याद आती है किसी की आती याद नहीं
उसके  बाद  अब  रहा  मुझे  कोई  याद   नहीं - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - कितने आये कितने गये किसी का कोई ख़ास नहीं
वक्त के साथ बदलते लोग किसी के कोई पास नहीं

अपने भी सपने हो गये मुद्दत बाद कोई मिला नहीं
इंतज़ार की घड़ियां गुज़रने पर भी कोई गिला नहीं

तमाम गुनाह माफ़ होंगे मैं माफ़ी का हकदार नहीं
ख़ता तमाम होंगे लेकिन मैं किसी का गुनहगार नहीं

खुदगर्ज ज़माने में मुहब्बत का भी वजूद कोई नहीं
गर इंसान में दिल होता पत्थर को पूजता कोई नहीं

अजंबी शहर में तलाश करने पर कोई मिलता नहीं
ढूंढने पर इस ज़माने में दर्द सिवा कुछ मिलता नहीं

मुझे मालूम था फूलों से कभी रफ़ाक़त रखता नहीं
घाव इसके हसीं थे जुदा होने पे फुरक़त करता नहीं

अपनो में भी गैर थे गैरों में अपना लगता कोई नहीं
ज़िंदगी ऐसे पड़ाव पर थी समझ सकता कोई नहीं

तुम तकल्लुफ़ रखना हमें उनसे मतलब कोई नहीं
इस जहान में खुदा के सिवाअपना लगता कोई नहीं - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - हम कैसे भूल जाते उसे भुलाया  जाता नहीं
उससे ही मुस्कान मेरी मुस्कुराया जाता नहीं

उसे ढूंढती ये पागल निगाहे वह मिलता नहीं
विरह कीअग्नि में तप रहा कहीं दिखता नहीं

साल हो गया उससे मिले क्या रहा याद नहीं
जबसे हम जुदा हुए उससे मेरी हुई बात नहीं

ज़माने में ढूंढते दर्द के सिवा कुछ मिला नहीं
दिल इबादत क र रहा मैं इतना भी बुरा नहीं

उसके बिना गुजरा लम्हा भुलाया जाता नहीं
उसकी कमी को पूरा करता कोई मिला नहीं

उसकी यादें सुबह शाम आती तो जाती नहीं
उसे भू ल ना अब मेरे लिए रहा आसान नहीं

कैसे भूल जाता मैं उसे, मुझसे हो पाता नहीं
बीते लम्हें याद आते किसीसे कह पाता नहीं

उसकी बाहों से लिपट कर बताना चाहता हूं
उसके बाद कोई रहा अब - तक हमदर्द नहीं

किसी के सीने लगना ख्याल मुझे आया नहीं
उसके बाद किसी को मेरा ख्याल आया नहीं

बहुत याद आती हैं पर किसी से कहता नहीं
उसके  बाद  मुझे  कोई  अपना  लगता  नहीं - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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Quote by kalam.ki.takat - क्यों दिल बनाया खुदा जब तोड़ना ही था
क्यों धड़कने के लिए ज़रूरी बाटना ही था

क्यों ज़िंदगी से बढ़कर मौत हसीं लगता ही था
क्यों वह रात की कालिमा में खुश रहता ही था

क्यों मुंतशिर रोशनी में दुःखी लगता ही था
क्यों सूरज के ढलने का इंतजार करता ही था

क्यों कालिमा मेरी तरह ख़्याल रखता ही था
क्यों तन्हाई में वह मुझसे इश्क़ करता ही था

क्यों मौत प्यारी हुई क्यों नफ़रत करता ही था
दुश्मन ज़माना रहा कौन अपना लगता ही था

क्यों फूल खिले टूटने पर घाव लगता ही था
क्यों रोशनी दिखाई कालिमा से राब्ता ही था

क्यों मुस्कुराना बताया अश्क बहना ही था
क्यों सीने से लगाया जब नफ़रत करना ही था

क्यों ख़्वाब दिखाया उसे पूरा करना भी था
क्यों तारे दिखाएं तुम्हें आसमां बनना भी था

क्यों हमें रुलाये लगता दुश्मन ज़माना ही था
क्यों ज़ख्म देकर घावपर मरहम लगाया ही था - Made using Quotes Creator App, Post Maker App
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